Structure Of Chloroplast

Structure Of Chloroplast – हरितलवक की खोज शिम्पर (Schimper, 1885) नामक वैज्ञानिक ने की | हरितलवक के द्वारा ही पौधों (plant) में प्रकाश-संश्लेषण क्रिया होती है |

हरित लवक की विशेषता –

उच्च जाति के पौधों में विशेषकर उनकी पत्तियों की पर्णमध्योतक (mesophyll) कोशिकाओं में तथा तनों के क्लोरेनकाइमा (chlorenchyma) कोशिकाओं में हरितलवक (chloroplasts) पाए जाते है |

हरितलवक (Chloroplast) (Gr. Chloro– green, plast = formed) की खोज का श्रेय ए०एफ० डब्ल्यू०एस० शिम्पर (A.F.W.S. Schimper, 1885) को जाता है | हरितलवक में हरे रंग का वर्णक क्लोरोफिल (chlorophyll , Gr., Chlor green and Phyll = leaf) उपस्थित होता है | हरितलवक में इस वर्णक (क्लोरोफिल) की उपस्थिति के कारण पौधों (तनों, शाखाओं एवं पत्तियों) का रंग हरा होता है | हरितलवक सामान्यतः पर्णमध्योतक कोशिकाओं (मीसोफिल कोशिकाओं), पेलीसेड कोशिकाओं एवं हरित ऊतक या क्लोरेनकाइमा (chlorenchyma) ऊतक में मिलते हैं | हरितलवक की संख्या विभिन्न वर्ग के पौधों में भिन्न-भिन्न होती है | क्लोरोफाइसी के शैवालों में इनकी संख्या एवं संरचना के आधार पर इन्हें स्पष्ट रूप से पहचाना जाता है | अनेक शैवालों की कोशिकाओं में हरितलवक की संख्या एक होती है |

उदाहरण – यूलोथ्रिक्स (Ulothrix) में मेखलाकार (girdle-shaped) एक क्लोरोप्लास्ट , स्पाइरोगायरा (Spirogyra) में रिबन के आकार (ribbon-shaped) का एक क्लोरोप्लास्ट , क्लेमाइडोमोनास (Chlamydomonas) में प्यालेनुमा (cup-shaped) एक क्लोरोप्लास्ट तथा जिग्निमा (Zygnema) में ताराकार (shellate-shaped) दो क्लोरोप्लास्ट उपस्थित होते हैं |

ऊडोगोनियम (Oodogonium) व क्लैडोफोरा (Chladophora) में जालिकावत आकार के होते हैं |

हरितलवक की परासंरचना (Ultra Structure of Chloroplast)

हरितलवक के बाहर , चारो ओर लाइपोप्रोटीन (प्रोटीन-लिपिड) की निर्मित दोहरी झिल्ली उपस्थित होती है | प्रत्येक झिल्ली (परत) की मोटाई 50 Å होती है | दोनों झिल्लियों के मध्य के स्थान को पेरीप्लास्टीडियल स्थान (periplastidial space) कहते हैं | झिल्ली के अन्दर प्रोटीन का बना एक तरल पारदर्शी पदार्थ (ground substance) होता है जिसे स्ट्रोमा (stroma) (Gr, stroma = spread out) कहते हैं | स्ट्रोमा के अन्दर अनेक विकर (enzymes) राइबोसोम्स (ribosomes) और कुछ ओसमियोफिलिक सूक्ष्म बूंदें (osmiophilic droplets) पाई जाती हैं | स्ट्रोमा के भीतर की कलाएँ या पटलिकाएँ (lamella) पायी जाती हैं जो एक-दूसरे के समानान्तर स्थित होती है और हरितलवक की सम्पूर्ण लम्बाई में फैली रहती है | प्रत्येक पटलिका का निर्माण दो कलाओं से होता है | थोड़े-थोड़े अन्तराल पर गोल, चपटी एकक कलाओं की बनी 10 से 100 तक पटलिकाएँ एक-दूसरे के ऊपर सिक्कों के बने एक ढेर के समान दिखाई देती हैं , जिन्हें थाइलेकॉयड (thylakoid) (Gr., thylac sack, and oid like) कहते हैं | थाइलेकॉयड (thylakoid) शब्द का प्रयोग मेन्क (Menke, 1961) ने किया | थाइलेकॉयड के बने एक ढेर को ग्रेनम (granum) (Gr, gran = grain) कहते हैं | विभिन्न ग्राना दूसरी पटलिकाओं द्वारा हरितलवक की लम्बाई में जुड़े रहते हैं | ग्राना को जोड़ने वाली इन पटलिकाओं को स्ट्रोमा पटलिकाएँ (stroma lamellae = frets) कहते हैं | ग्राना की संख्या व आकार विभिन्न पौधों में भिन्न होते हैं |

प्रायः एक हरितलवक में 40 से 60 तक ग्राना पाए जाते हैं | ग्राना पटलिकाओं की कला प्रोटीन तथा फॉस्फोलिपिड की बनी होती है | इनमें पर्णहरिम (chlorophyll) तथा कैरोटिनॉइड (carotenoid) पाए जाते हैं | हरे शैवाल के हरितलवक में ग्राना नहीं होते | थाइलैकॉयड की भीतरी कला पर बहुत से सूक्ष्म दाने पाए जाते हैं जिन्हें क्वांटासोम (quantasome) कहते हैं | पार्क एवं पौन (Park and Pon) ने सन् 1961 में तथा पार्क एवं बिगिन्स (Park and Biggins) ने सन् 1964 में इनकी खोज की | कुछ समय पूर्व क्वाण्टासोम को प्रकाश संश्लेषण की इकाई (photosynthetic unit) कहा प्रत्येक क्वाण्टासोम में 230 पर्णहरिम अणु पाए जाते हैं | हरितलवक (chloroplast) के स्ट्रोमा में मण्ड-कण (starch grains) भी पाए जाते हैं जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के फलस्वरूप बनते हैं |

हरितलवक का रासायनिक संघठन (Chemical Composition of Chloroplast)

शुष्क भार के आधार पर हरितलवक में निम्नलिखित पदार्थ पाए जाते हैं –

प्रोटीन (Protein)40 – 50%
पर्णहरिम (Chlorophyll)3 – 10%
राइबोन्यूक्लीक अम्ल (RNA)2 – 5%
डिऑक्सीराइबोन्यूक्लीक अम्ल (DNA)सूक्ष्म मात्रा
फॉस्फोलिपिड23 – 25%
कैरोटिनॉइड1 – 2%
विभिन्न तत्व, (Fe, Cu, Zn, Mn, Mg आदि)सूक्ष्म मात्रा

पर्णहरिम के प्रकार (Types Of Chlorophyll)___

1 – पर्णहरिम ‘a’ (C55H72O5N4Mg) – 75% इसमें पाइरोल चक्र में मेथिल (CH3) समूह होता है |

2 – पर्णहरिम ‘b’ (C55H70O6N4Mg) – 25% ( इसमें पाइरोल चक्र में CH3 समूह के स्थान पर ऐल्डिहाइड (-CHO) समूह होता है |

3 – पर्णहरिम ‘c’ (C35H32O5N4Mg) – शैवालों के वर्ग बेसिलेरियोफाइसी (Bacillariophyceae) व फियोफाइसी (Phaeophyceae) में पर्णहरिम ‘B’ के स्थान पर पाया जाता है |

4 – पर्णहरिम ‘d’ ( (C54H70O6N4Mg) – शैवालों के वर्ग रोडोफाइसी (Rhodophyceae) में पर्णहरिम ‘b’ के स्थान पर पाया जाता है |

5 – पर्णहरिम ‘e’ – यह जैन्थोफाइसी (Xanthophyceae) वर्ग के शैवालों में पर्णहरिम ‘b’ के स्थान पर पाया जाता है |

इनके साथ हरितलवक में पीले अथवा नारंगी (yellow or orange) रंग के दो कैरोटिनॉइड्स (carotenoids), कैरोटीन (carotene = C40H56 नारंगी वर्णक) और जैन्थोफिल (xanthophyll = C40H56O2 पीले वर्णक) पाए जाते हैं। ये दोनों हाइड्रोकार्बन होते हैं।

पाइरीनॉइड (Pyrenoid) – हरे शैवाल और कुछ दूसरे पौधों , उदाहरण – एन्थोसिरोस (Anthoceros) , सैलाजिनेला (Selaginella) , आदि के हरितलवक में प्रोटीन की बनी एक विशेष रचना होती है जिसे पाइरीनॉइड (pyrenoid) कहते हैं | इनके चारों ओर मण्ड (starch) का संग्रह रहता है |

हरितलवक के कार्य (Functions of Chloroplast)

हरितलवक का मुख्य कार्य प्रकाश-संश्लेषण है | इस क्रिया में दो चरण होते हैं –

1 – प्रकाश अभिक्रिया या हिल अभिक्रिया (Light Reaction or Hill Reaction) – इसे सामान्यतः अभिक्रिया भी कहते हैं | इस क्रिया का प्रमुख स्थान हरितलवक लैमली एवं ग्रेना (grana) होता है | प्रकाशीय अभिक्रिया में ग्रेना पर्णहरिम (chlorophyll) द्वारा सूर्य की ऊर्जा (प्रकाशीय ऊर्जा) ATP एवं NADP.2H (रासायनिक ऊर्जा) में परिवर्तन होता है | जल अपघटन के कारण NADP+ से NADPH+ H का निर्माण होता प्रकाशीय अभिक्रिया में ATP का उत्पादन होता है एवं 02 मुक्त होती है |

2 – प्रकाशहीन अभिक्रिया (Dark Reaction) – यह क्रिया स्ट्रोमा में होती है | इसमें वातावरण से अवशोषित कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) द्वारा शर्करा का निर्माण होता है | इस क्रिया में ATP व NADP.2H प्रयुक्त हो जाते हैं |

पौधों के हरे भागों में स्थित हरितलवक (chloroplast) प्रकाश-संश्लेषण (photosynthesis) क्रिया द्वारा वातावरण की कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के अपचयन (reduction) से समस्त जीवों के लिए भोजन (शर्करा व मण्ड आदि) का निर्माण करते हैं | इस क्रिया में ऑक्सीजन (O2) मुक्त होती है | इस प्रकार पौधों के हरे भागों में स्थित हरितलवक पूरे वातावरण को शुद्ध रखने का कार्य करते हैं तथा सभी जीवों को श्वसन के लिए ऑक्सीजन (O₂) उपलब्ध कराते हैं |

हरितलवक में प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया में कैल्विन चक्र (Calvin cycle) द्वारा माध्यमिक पदार्थ (intermediate product) के रूप में फॉस्फोग्लिसेरेल्डिहाइड (phosphoglyceraldehyde = PGAL) बनता है जिससे आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त ऐमीनो अम्ल (amino acids) , वसा अम्ल (fatty acids) , प्यूरिन (purines) एवं पिरिमिडीन (pyrimidines) का संश्लेषण भी होता है |

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