classification of arthropoda

Classification Of Arthropoda – Gr. Arthros = joint , podos = foot ;

यह जन्तु जगत का सबसे बड़ा संघ है जन्तु जगत की 90% जातियां इस संघ से आती हैं | सन् 1845 में वॉन सीबोल्ड (Von Seibold) ने आर्थोपोडा संघ की स्थापना की |

सामान्य लक्षण (General Characteristics) – 1 – इस संघ के जन्तु हर स्थान पर पाए जाते हैं , जैसे जल, स्थल, वायु, भूमि के नीचे, तथा वृक्षों पर |

2 – इनका शरीर द्विपार्श्वसममित (bilaterally symmetrical) , त्रिस्तरीय (triploblastic) तथा ऐनेलिडा के समान समखण्डों में विभाजित (metamerically segmented) होता है |

3 – शरीर बाहर से मोटे , दृढ , काइटिन से बने क्यूटिकल (cuticle) से घिरा रहता है | यह वाह्य कंकाल (exoskeleton) बनाता है | समय – समय पर वही कंकाल का खोल उतार कर फ़ेंक दिया जाता है |

4 – शरीर सिर (head) , वक्ष (thorax) तथा उदर (abdomen) में विभेदित होता है |

5 – प्रत्येक खंड पर मूलतः विभिन्न कार्यों के लिए रूपांतरित संधि युक्त उपांग पाए जाते हैं |

6 – इनकी देहगुहा को हीमोसील (heamocoel) कहते हैं , क्योंकि यह हीमोलिम्फ (heamolymph) से भरी होती है |

7 – श्वसन अंग विभिन्न प्रकार के होते हैं , जैसे जलीय जंतुओं में क्लोम (gills) , स्थलीय जंतुओं में ट्रेकिया (trachea) या बुक लंग्स (book lungs) | कुछ जंतुओं में शरीर की सतह से भी श्वसन होता है |

8 – रुधिर परिसंचरण तंत्र (blood vascular system) खुले प्रकार (open type) का होता है | केशिकाएं (capillaries) अनुपस्थित होती हैं | ह्रदय (heart) पृष्ठ सतह पर स्थित होता है | रुधिर कोटर (blood sinuses) पाए जाते हैं |

9 – उत्सर्जन अंग वभिन्न पारकर के होते हैं जैसे ; मैल्पीघी नलिकाएं (malpighian tubules) , ग्रीन ग्रंथियां (green glends) अदि |

10 – केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में एक तंत्रिका वलय (nerve ring) एवं दोहरी तंत्रिका रज्जु (nerve cord) पायी जाती है |

11 – सिर पर एक जोड़ी संयुक्त नेत्र (compound eye) होते हैं |

12 – ये एकलिंगी होते हैं तथा इनमें लैंगिक द्विरूपता (sexual dimorphism) पायी जाती है |

13 – परिवर्धन प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार का होता है |

वर्गीकरण (Classification)

स्टोरर तथा यूसिंगर ने संघ आर्थ्रोपोडा को शरीर के विभाजन (division of the body) , श्रृंगिकाओं (antenae) एवं जबड़ों के आधार पर छः उपसंघों (subphyala) में बांटा गया है –

उपसंघ 1 – ट्राइलोबाइटा (Subphylum Trilobita) –

1 – इस उपसंघ के सभी जंतु समुद्री थे जो विलुप्त हो चुके हैं |

2 – इनका शरीर दो लंबवत् खांचों द्वारा तीन लम्बे पिंडों में विभक्त होता है |

3 – इनका शीर्ष अस्पष्ट था |

4 – उदर भाग 2 से 29 खण्डों में विभाजित था |

उदाहरण – ट्राइआर्थ्रस (Triarthrus) |

उपसंघ 2 – चेलिसेरेटा (Subphylum Chelicerata) –

1 – इस उपसंघ के सभी सदस्य मुख्यतः स्थलीय हैं |

2 – शरीर दो भागों में विभेदित होता है : सिफैलोथोरैक्स (Cephalothorax) तथा उदर (Abdomen) |

3 – सिफैलोथोरैक्स (Cephalothorax) पर एक जोड़ी चेलिसेरी (chelicerae) , एक जोड़ी पैड़ीपल्प्स (padypalps) तथा चार जोड़ी टाँगें उपस्थित होती हैं |

4 – श्वसन क्लोमों (gills) , ट्रेकिया (trachea) या बुक लंग्स (book lungs) द्वारा होता है |

5 – उत्सर्जन कॉक्सल ग्रंथियों (coxal glands) या मैल्पीघी नलिकाओं (malpighian tubules) द्वारा होता है |

6 – जंतु एकलिंगी (unisexual) होते हैं |

इस उपसंघ को तीन वर्गों में बांटा गया है –

वर्ग 1 – मीरोस्टोमैटा (Class 1 – Merostomata)

1 – इस वर्ग के सभी सदस्य समुद्री जल में पाए जाते हैं |

2 – सामान्यता इनमें 5 या 6 जोड़ी उपांग पाए जाते हैं |

3 – श्वसन क्लोमों द्वारा होता है |

4 – उदर के अंतिम भाग पर टेल्सन (telson – किसी आर्थ्रोपोड जैसे केकड़ा, झींगा आदि के शरीर का आखिरी खंड ) पाया जाता है |

उदाहरण Limulus (लिमुलस) : किंग क्रेब : यह जीवित जीवाश्म का उदाहरण है |

वर्ग 2 – एरेक्निडा (Class 2 – Arachnida) (Gr. Arachnea = spider , oid = like)

1 – इनका शरीर दो खण्डों का बना होता है : अग्र खंड को प्रोसोमा (prosoma) तथा पश्च खंड को ऑपिस्थोसोमा (opisthosoma) कहते हैं |

2 – प्रोसोमा पर सामान्य नेत्र एवं 6 जोड़ी संधि युक्त उपांग पाए जाते हैं |

3 – शृंगिकाएँ (antennea) एवं जबड़े (jaws) अनुपस्थित होते हैं |

4 – श्वसन अंग बुक लंग्स (booklungs) या ट्रेकिया (trachea) होते हैं |

5 – ह्रदय पृष्ठीय तथा नालाकार होता है |

6 – उत्सर्जन मैल्पीघी नलिकाओं अथवा कॉक्सल ग्रंथियों के द्वारा होता है |

7 – ये एकलिंगी होते हैं तथा निषेचन आंतरिक होता है |

8 – परिवर्धन प्रत्यक्ष होता है |

9 – ये अंडजरायुज (oviparous) या जरायुज (vivparous) होते हैं |

उदाहरण 1- पैलेम्निअस (Palamnaeus– बिच्छू जरायुज होते हैं ) ,बूथस (Buthus) , टिक्स (Ticks) , माइट (Mite) , मकड़ियां (Spiders) |

वर्ग 3 – पिक्नोगोनिडा ( Class 3 – Pycnogonida )

1 – इस वर्ग में छोटी समुद्री मकड़ियां (sea spider) आती हैं |

2 – शरीर शिरोवक्ष (cephalothorax) का बना हुआ तथा उदर कम विकसित |

3 – चूषक के समान मुख एक शुण्ड (proboscis) पर स्थित होता है |

4 – सिर पर 3 जोड़ी उपांग तथा 4 नेत्र उपस्थित |

5 – प्रायः 8 जोड़ी चलन पाद (walking leg) उपस्थित |

6 – श्वसन व उत्सर्जन अंग अनुपस्थित |

उदाहरण निम्फोन (Nymphon) , पिक्नोगोनम (Pycnogonum) |

उपसंघ 3 – मैंडिबुलेटा ( Subphylum 3 – Mandibulata )

1 – शरीर सिर , वक्ष तथा उदर में विभेदित होता है |

2 – सिर पर एक या दो जोड़ी शृंगिकाएँ (antennea) , एक जोड़ी मैंडिबल्स (mandibles) तथा दो जोड़ी मैक्सिली (maxillea) उपस्थित होते हैं |

3 – श्वसन ट्रैकिया या क्लोम के द्वारा होता है |

4 – उत्सर्जन मैल्पीघी नलिकाओं (malpighian tubules) या ऐन्टीनल ग्रंथियों (antenal glands) द्वारा होता है |

वर्ग 1 – क्रस्टेशिया (Class 1 – Crustacea)

1 – इस वर्ग के अधिकांश सदस्य जलीय (aquatic) होते हैं |

2 – शरीर दो भागों में विभेदित – अग्र भाग को सिफ़ेलोथोरैक्स (cephalothorax) तथा पश्च भाग को उदर (abdomen) कहते हैं |

3 – शरीर कठोर एवं सुरक्षात्मक काइटिन से बने क्यूटिकल (Cuticle) से बना होता है |

4 – उपांग द्विशाखित (bimerous) होते हैं |

5 – श्वसन क्लोमों (gills) या शरीर की भित्ति द्वारा होता है |

6 – उत्सर्जन अंग कॉक्सल ग्रंथियों (coxal glands) के रूप में होता है |

7 – जीवन चक्र में नॉलिअस (naupleus).मैटानॉप्लिअस (metanaupleus), जोइआ (zoaea) आदि लार्वा अवस्थाएं पायी जाती हैं |

उदाहरण – एस्टेकस (Astacus): क्रे मीन (Cray fish) , पैलिमोन (Palaemon): झींगा मछली या प्रॉन (Prawn) , बेलेनस (Balanus) , यूपैगुरस (Eupagurus): साधू केकड़ा (Hermit crab) , हिप्पा (Hippa): (Mole crab) , डफैनिया (Daphnia): जल पिस्सु (Water flea) , साइक्लोप्स (Cyclops) , लीपस (Lepas): (Goose barnacle) , सैक्यूलाइना (Sacculina): केकड़े पर परजीवी , कैन्सर (Cancer) -केकड़ा (Crab) , साइप्रिस (Cypris): (Mussel shrimp) |

वर्ग 2. डिप्लोपोडा (Class 2 – Diplopoda)

1 – शरीर लम्बा, बेलनाकार एवं कृमिरूपी होता है।

2 –सिर पर एक-एक जोड़ी एन्टीनी, मैन्डिबल्समैक्सिली होते हैं।

3 – उदर 20 से 100 खंडों का बना होता है।

4 – वक्ष के प्रत्येक खंड पर एक-एक जोड़ी उपांग तथा प्रत्येक उदर खंड पर दो जोड़ी टांगें पायी जाती हैं।

उदाहरण – 1-जूलस (Julus) , मिलीपीड (millipede): इसे सहस्रपादी (thousand leggers) भी कहते हैं। ,

2 –ग्लोमेरिस (Glomeris)

वर्ग 3 – चीलोपोडा (Class 3- Chilopoda)

1 – ये भी स्थलीय (terrestrial) होते हैं।

2 –शरीर सिर एवं धड़ में विभेदित होता है।

3 – इनके शरीर पर सैकड़ों (hundreds) उपांग पाये जाते हैं।

4 –धड़ के प्रत्येक खंड पर एक-एक जोड़ी उपांग उपस्थित होते हैं।

5 – विषैला नखर (poison claw) पाया जाता है।

डिप्लोपोडा तथा चीलोपोडा को मिरियापोडा (Myriapoda) में रखा जाता है।

उदाहरण – स्कोलोपेन्डा (Scolopendra) – इसे शतपादी (centipede or hundred leggers) या कनखजूरा भी कहते हैं।

वर्ग 4 – इन्सेक्टा (Class 4 – Insecta)

1 –इस वर्ग के सदस्य ( कीट वर्ग ) सभी प्रकार के वातावरण में पाये जाते हैं।

2 – शरीर तीन भागों में विभेदित होता है , सिर (head), वक्ष (thorax) तथा उदर (abdomen)।

3 – वक्ष भाग में तीन जोड़ी सन्धियुक्त उपांग पाये जाते हैं।

4 – कीटों में एक या दो जोड़ी पंख होते हैं।

5 – सिर पर एक जोड़ी संयुक्त नेत्र (compound eyes), एक जोड़ी एन्टिनी (antennae) तथा विभिन्न प्रकार के मुखांग पाये जाते हैं।

6 – सिर 6, वक्ष 3 तथा उदर 7-11 खंडों का बना होता है।

7 – लार ग्रंथियां (salivary glands) उपस्थित होती हैं।

8 – श्वसन ट्रेकिया (trachea) द्वारा होता है।

9 – उत्सर्जन मैल्पीधी नलिकाओं द्वारा होता है। कीट यूरिकोटेलिक (urecotelic) अर्थात यूरिया का उत्सर्जन करते हैं |

10 – कीट एकलिंगी होते हैं। इनमें लैंगिक द्विरूपता (sexual dimorphism) भी होती है।

11 – निषेचन प्रायः आन्तरिक होता है। परिवर्धन प्रत्यक्ष (direct) तथा अप्रत्यक्ष (indirect) दोनों प्रकार का होता है।

उदाहरण –लेपिस्मा (Lepisma): रजत मीन (Silver fish) , मस्का (Musca) घरेलू मक्खी (house fly) ,बाम्बिक्स (Bombyx) रेशम का कीट (silk worm) , रानाटरा (Ranatra), जलीय बिच्छू (water scorpion) , पैडीकूलस (Pediculus) जूँ (Louse) , साइमैक्स (Cimax) खटमल (Bed bug) , ड्रेगन मक्खी (Dragon fly) , एपिस (Apis) मधुमक्खी (honey bee) , टर्माइट (Termite) – सामाजिक कीट

वर्ग 5 – पॉरोपोडा (Class 5 – Pauropoda)

1 – इस वर्ग के सभी सदस्य स्थलीय होते हैं।

2 –इनका शरीर सूक्ष्म, नालाकार एवं कृमिरूपी होता है।

3 – शरीर में 12 खंड पाये जाते हैं। यह सिर तथा धड़ में विभेदित होता है।

4 – चलन उपांगों की 9-10 जोड़ियां पायी जाती हैं |

5 – नेत्र अनुपस्थित होते हैं।

उदाहरण: पॉरोपस (Pauropus)

वर्ग 6 – सिम्फाइला (Class 6 – Symphyla)

1 – इस वर्ग के सदस्य भी भूमिगत होते हैं तथा इनका शरीर 6 मिमी लम्बा होता है |

2 – सिर पर नेत्र अनुपस्थित लेकिन श्रृंगिकाएं उपस्थित होती हैं।

3 – चलन उपांग 10-12 जोड़ी होते हैं।

4 – धड़ 15 से 22 खंडों में बँटा होता है।

उदाहरण – स्कुटीजरेला (Scutigerella)

उपसंघ 3. पेन्टोस्टोमिडा (Subphylum 3. Pantostomida)

1 – इस उपसंघ के सदस्य स्तनधारियों के ट्रेकिया में अन्तः परजीवी होते हैं।

2 – इनका शरीर कोमल, अखंडित तथा कृमिरूपी होता है।

3 – श्रृंगिकाओं एवं चलन उपांगों का अभाव होता है।

उदाहरण – लिन्गुएटुला (Linguatula)

उपसंघ 5 – टारडीग्रेडा (Subphylum 5 – Tardigrada)

1 – इस उपसंघ के जन्तुओं को जलभालू (water bears) कहते हैं।

2 – ये 1 मिमी लम्बे होते हैं।

3 – शरीर नालाकार एवं खंडविहीन होता है।

4 – चार जोड़ी अखंडीय छोटे ठूंठनुमा व पंजेयुक्त चलन पाद उपस्थित होते हैं।

5 – ये एकलिंगी होते हैं।

उदाहरण – ऐकाइनिस्कस (Echiniscus)

उपसंघ 6 – ओनाइकोफोरा (Subphylum 6- Onychophora)

1 – इस उपंसघ के जन्तु स्थलीय, पतले व कृमि के आकार के होते हैं।

2 – शरीर लगभग कैटरपिलर के समान लेकिन खंडविहीन होता है।

3 – सिर अस्पष्ट लेकिन श्रृंगिकाएं एवं पैल्प उपस्थित होते हैं।

4 – शरीर पर 14 से 44 जोड़ी छोटे, ठूंठनुमा, नखरयुक्त चलन पाद उपस्थित होते हैं।

5 – इनमें श्वसन ट्रेकिया (trachea) द्वास होता है।

6 – उत्सर्जन नेफ्रीडिया (nephridia) द्वारा होता है।

7 –एकलिंगी व जरायुज होते हैं।

उदाहरण – पेरीपेटस (Peripatus)।

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